जितनी भावनाएं हैं उतने शब्द नहीं !
जैसे ही हम किसी ख्याल की ओर बढ़ते हैं शब्दों को पता चल जाता है !
शब्द जैसे भी हों अक्षर को कोई दोष नहीं देता !
शब्द को बचाने के लिए भावनाओं से लड़ना पड़ता है !
मुंह में बन कर कान तक जाते जाते शब्द ह्रदय को छु आते हैं !
जब अक्षर मंडराने लगे अक्षरों पर समझो मन में शब्द उतरने लगे हैं !
शब्द अपना अर्थ ले के घूमते हैं !
तुकबंदी में शब्दों की रिश्तेदारी नहीं देखी जाती !
शब्द का अर्थ उसके आकार से नहीं लगता !
किसी शब्द के लायक बनने में कई वाक्य लग सकते हैं !
‘दो शब्द’ को चार शब्द बनते देर नहीं लगता !
शब्द बहुरुपिया होते हैं ! विचारों में ऐसे समा जाते हैं जैसे लगता है शब्द ही विचार हैं !
शब्द के तीन यार … कागज़ कलम और विचार !
दिल से निकली बातों के शब्द अलग ही होते हैं !
शब्द भावनाओं के घोसले हैं !
शब्द हमारी इन्द्रियों की सवारी करते हैं !
शब्द भाव जगाते हैं और हम उन्हें बढ़ा देते हैं !
आप जो चाहे लिखें… जो चाहें बोलें…शब्दों के भण्डार गृह की चाभी सबके पास है !
शब्द खर्चीले होते हैं ! कभी कभी बेशकीमती हो जाते हैं तो कभी कभी बहुत महंगे पड़ते हैं !
उगला शब्द निगला नहीं जाता !
शब्द बहुत काम आते हैं !
शब्द के ज़ख्म शब्द ही भरते हैं !
और राग … और रंग … और शब्द चाहिए !
ढाई आखर में सिमटा पर पूरी दुनिया मे फैला, मैं एक शब्द से मिला !
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Blog: sanjay jha mastan Topics:Cinema, Art, Theatre
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jha'लर काटने आता है ?
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