#‎रायतारिपोर्ट‬ ( top secret )

सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति ओबामा को रायता नहीं परोसा जायेगा ! थाली में रायते को फैलने से रोकने में असक्षम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं ! रायता ने इस बात के लिए आपत्ति जताई है और पतले व्यंजनों के संघ ने दही, चटनी, घी, रायता के फैलने को अपनी संस्कृति बताया है ! एक ज्ञापन में रायता ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है ! उनका कहना है फैलना हमारा धर्म है ! हम हर भोज में फैलेंगे ! विश्व में रायता का डंका जरूर बजेगा ! फैलने के अपने विशिष्ट गुण की वजह से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने रायते को थाली से दूर रखने की सिफारिश की थी ! रायता को थाली में ट्रैक करने के लिए जी पी आर एस लगवा देने की सिफारिश को भारत ने मानने से इंकार कर दिया ! एक अमेरिकी दल ने अपने विशेष रिपोर्ट में रायते को रहस्यमय बताया और अपने किये गए अध्ययन का खुलासा करते हुए रायता को भरोसे लायक नहीं बताया ! रायता समतल थाली में हर तरफ फैलता है ! भोजन के पूर्वा – अभ्यास में अमरीकियों से रायता नहीं संभला और फ़ैल गया ! किसी की थाली में ब्रेड से लिपट गया तो किसी के केक को चौपट कर गया ! रायता परोसते ही अमरीकी ‘शिट – शिट’ करने लगे ! कुछ के हाथ से थाली छूट गयी और पतलून पर रायता फैल गया ! कुछ कमांडो किसी तरह अपने रायते पर काबू पा सके और उसे उन्होंने अमेजिंग रायता का नाम दिया !

#क्रिकेट_का_भूत

खाली दिमाग क्रिकेट के भूत का घर है ;)

हिंदुस्तान और पाकिस्तान को डराने के लिए क्रिकेट का भूत ऑस्ट्रेलिया भी चला जाता है ;)

क्रिकेट का भूत विज्ञापन के चक्कर में न्यूज़ देखता है ;)

क्रिकेट का भूत भी वर्ल्ड – कप के लिए मरता है ;)

आदमी की ही तरह क्रिकेट का भूत भी हिन्दू मुसलमान होता है ;)

कोई खेले न खेले क्रिकेट का भूत हर आत्मा से खेलता है ;)

क्रिकेट का भूत देश को भूतनी के हवाले कर देता है ;)

क्रिकेट का भूत दाऊद से भी नहीं डरता ;)

क्रिकेट के भूत में बिपाशा नहीं बच्चन हैं ;)

क्रिकेट का भूत भटकते भटकते पाकिस्तान पहुँच ही जाता है ;)

 

आओ करें डिबेट

इस पेट से उस पेट
आओ करें डिबेट

किसने छोड़ा जंतर मंतर
कौन पहुंचेगा इंडिया गेट

देश का नेता कैसा हो
कैसे वेट हो ड्राई स्टेट

कैसे मिली आजादी, और
किसने कर दिया मटियामेट
आओ करें डिबेट

कौन है हारल, कौन है वायरल
मेरी स्ट्रैटेजी, या तेरी ट्रेजेडी

कौन खायेगा फिश फ्राई
कौन वेजिटेबल कटलेट

फां – फूं, अलाय – बलाय
कुछ नॉइस करें क्रिएट
आओ करें डिबेट

हरा, गेरुआ रंग में किसने
पॉलिटिक्स दिया है फेंट
मेरा पेट तेरा पेट
आओ करें डिबेट

कौन लिखेगा किस्मत
गरीब जनता या अमीर कैंडिडेट
कौन करेगा कट पेस्ट
आओ करें डिबेट

मेरा रिबेट, तेरा रेट
इम्प्लीमेंटेशन का दावा
और लाग लपेट

मिडिया करेगी डांस
जनता करेगी वेट
इस पेट से उस पेट
आओ करें डिबेट

‪#‎वोटविचार‬

- एक वोट कई विचार रखता है !

– बहुत सारे विचार हैं पर वो एक वोट भर भी नहीं हैं !

– आपके धर्म के साथ कुछ भी हो सकता है पर आपके वोट का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता !

– वोट को कोई धर्म काट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म लूट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म छीन नहीं सकता / वोट को कोई धर्म बाँट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म खरीद नहीं सकता / वोट को कोई धर्म बेच नहीं सकता / आपने किसको वोट दिया कोई धर्म जान नहीं सकता / वोट हर धर्म में गुप्त है !

– आप किसी के भी नौकर हो सकते हैं पर अपने वोट के मालिक हैं !

– आप नहीं भी रहें लेकिन आपका दिया हुआ वोट पांच साल तक रहेगा !

–  अठारह साल में मिली हर शक्ति क्षीण हो सकती है पर वोट देने की ताक़त जीवन भर ख़त्म नहीं होती !

– चाहे कोई किसी भी वोट बैंक में आपको रख ले आप अकेले वहाँ से सेंध मार के निकल सकते हैं !

– अपना वोट सवा सौ करोड़ का नोट !

लघु लोक कथा ‪#‎ललोक

तालाब के किनारे कोई चिल्ला रहा था ” कमल में किरण … कमल में किरण …” उत्साह में सब उस तरफ भागे … तालाब के बीचोबीच कमल के पास किरण फूट रही थी, देखने की हड़बड़ में कुछ लोग छप छप तालाब में गिर रहे थे … शोर सुनकर पंछी ‘ट्वीट – ट्वीट’ करने लगे … पोखर पर झाड़ियों के पीछे शेर के कान खड़े हो गए … उसने तालाब पर शिकार का झुण्ड देख लिया था … पानी में कमल के पास घड़ियाल की पीठ उगते सूरज में चमक रही थी !

महानगरीय सोच / महालोक २३

वो महानगर में अक्सर सोचता –
सोचते सोचते सो जाता और नींद में जाकर सपने में सोचने लगता, सोचता हुआ गाने लगता ! गाते गाते रोने लगता और रोते, रोते सोचता ! वो सोचता हुआ चलता चला जाता, और सोचते सोचते सातों समुन्दर पार कर जाता ! वो सोचता हुआ पहुँच जाता किसी ऐसे जगह जो पहले कभी सोची नहीं गयी होती ! वो वहां भी सोचने लगता ! उसके सोच की सीमा हर सीमा को लाँघ चुकी थी ! उसकी सोच हर विंदू को छू चुकी थी ! वो हर सांस में सोचता ! इतना सोचता की सांस लेते ही मोटा हो जाता और सांस छोड़ते ही पतला हो जाता ! वो जिधर देखता सोचने लगता ! जो सुनता सोचने लगता ! जो पढता सोचने लगता ! सोचने से उसके ख्याल बढ़ते ! वो और सोचता और उसके ख्याल और बढ़ते ! स्वाद, भूख, नशा, घमंड, इत्र, लड़की, जानवर, सोना, ईश्वर, संभोग वो सब पर एक साथ सोचता ! उसकी सोच से रोटियाँ फूलने लगतीं, अमरुद पक जाते, सूरज उगता, चढ़ता और डूब जाता ! मौसम बदल जाते ! वो इतना सोचता कि सोच में बच्चे बड़े होकर बूढ़े हो जाते और फिर मर जाते ! औरतें गर्भवती हो जातीं ! अपनी सोच में वो उनके गर्भाशय में सोच भर देता ! माएँ सोच पैदा करतीं ! औरत मर्द मिल के सोचते और सोच सोच के बच्चे पैदा करते ! वो हर तस्वीर पर सोचता ! जब सब उसके सोच की तस्वीरें देखते तब वो तस्वीरों के पीछे बैठ कर सोचता ! वो बड़ा सोचता ! वो इतना सोचता कि छोटी सोच भी बड़ी हो जाती ! वो नया सोचता ! उसके सोच से दिशा बदल जाती ! पूरब पश्चिम हो जाता ! उत्तर दक्षिण हो जाता ! उसकी सोच बड़ी होने लगी और वो अपनी सोच से छोटा होने लगा ! एक दिन वो गायब हो गया ! उसकी सोच उसे कहाँ ले गई ये हम और आप सोच भी नहीं सकते ! वो अभी कहाँ है मुझे नहीं पता पर उसे जरूर पता होगा कि अभी इस वक़्त जब हम उसके बारे में सोच रहें हैं तो उसे कहाँ होना चाहिए ! वो इन बातों को बहुत पहले सोच चूका था ! अभी वो जहाँ भी होगा इसके आगे सोच रहा होगा ! और क्या पता उसने सब सोच भी लिया हो …

‪#‎बदलाव‬

- तुम कितने बदले बतलाओ बदलाव ?

– बदला ले रहे हैं या बदलाव ला रहे हैं ?

– दुराव छुपाव और बदलाव सब एक है !

– बदलाव बस एक प्रस्ताव है !

– आव देखा न ताव कर दिया बदलाव !

– बदलाव, bad – law है !

– बदलाव की राजनीति में राजनीति होती है बदलाव नहीं !

– आओ, जाओ, बदलाव !

– बदलाव है या ऊदबिलाव ?

महानगर में खिंचा – खींची / महालोक – २२

आँख से तो कोई कुछ देखना ही नहीं चाहता सबको मोबाइल कैमरे में सब खींच के किसी और को दिखाना है ! जिसके लिए ये सब किया जाता है वो भी मोबाइल कैमरे में सब कुछ किसी तीसरे के लिए खींच रहा है ! फोटो की खिंचा – खींची में दृश्य की असली तस्वीर मन की आँख से ली ही नहीं जाती … हम देखते ही रह जाते हैं … 

मेरे ख्याल से

हर नए ख्याल में डगमगाती हुई एक अस्वीकृति होती है जिससे लड़ के सबसे पहले उसको जीतना पड़ता है ! हर नया ख्याल सुनाने पर किसी को सुनायी नहीं देता इसीलिए उसे जोर से बोलना पड़ता है ! हर नए ख्याल का एक हमशक्ल ख्याल होता है जिससे मिल कर उसे झुठलाना पड़ता है ! हर नया ख्याल तब तक सिर्फ एक ख्याल होता है जब तक हम उस पर भरोसा नहीं कर लेते ! ख्याल के खो जाने का डर सबसे व्यस्त ख्याल है ! ख्याल कभी अकेले नहीं रह पाते इसीलिए हम उनके साथ रहते हैं ! ख्याल बहुत जल्द बदलते हैं इसीलिए हम उन्हें बाँटते रहते हैं …

– मेरे ख्याल से

महानगर में अभिनेत्री की तलाश / महालोक – २१

पात्र परिचय – अभिनेत्री

चवन्नी सी बदकिस्मत अठन्नी सी बेकार और रुपये सी मुफ्त वो अठारह साल में ही पच्चीस साल सी दिखने वाली लड़की जो महानगर की बदनाम गलियों में ला के छोड़ दी गयी है , जो रंडी बुलाने पर किसी भी मर्द की आँखों में देख के मादरचोद कह सकती है…उसे Bold and beautiful कहना ही काफी नहीं होगा ! मर्द को छठी का दूध याद दिलाने वाली हेठी, अपने आप को साबित करने वाली ज़िद, और मांसल बदन ही उसका परिचय नहीं है ! नमक इतना की किसी को भी आँखों से ही पिघला दे ! निर्वस्त्र किये जाने पर कृष्ण को नहीं बुलाती पर निर्वस्त्र करने वाले के दंभ को खुद ठंडा कर के वापस भेज देती है !

एक महानगरीय लोककथा में ऐसी चरित्र को खेलने के लिए एक अभिनेत्री चाहिए ! बोलने के लिए ताक़तवर शब्द मिलेंगे और करने के लिए मर्मस्पर्शी दृश्य ! महानगरीय भाषा पर पकड़ होना अनिवार्य ! लोककथा की शूटिंग अगले महीने से महानगर में ही होगी ! आपकी काबिलियत और दिलचस्पी पर Audition होगा ! अपनी तस्वीर और इस चरित्र को करने की ख्वाहिश के साथ एक पत्र मेल करें ! ऐसी किसी talented actor के जानकार, model – coordinators , और मददगार मित्र से सहयोग अपेक्षित है !