शब्दयोग‬

मैंने देखा शब्द एक दुसरे को खा रहे हैं ! खाते हुए वे एक दूसरे को देख भी नहीं रहे थे ! ‘विमर्श’ ‘अध्यक्ष’ को खा गया ‘टिप्पणी’ ‘पार्टी’ को खा गयी ! ‘विरोधी’ ‘गतिविधि’ को खा रहे थे ! ‘दिल’ ‘प्रेरणा’ को खा रहा था ! एक या अधिक वर्णों से बनी हुई स्वतंत्र सार्थक ध्वनि भी एक दूसरे को खा रहे थे ! एक वर्ण से निर्मित शब्द अनेक वर्णों से निर्मित शब्द को खा रहे थे ! ‘शेर’ को ‘कुत्ता’ खा रहा था ! बनावट के आधार पर बने शब्द भी अपने सारे भेद को भुला कर एक दुसरे को खा – चबा रहे थे ! ‘रूढ़’ को ‘योगिक’ खा रहा था ‘योगिक’ को ‘योगरूढ़’ ! ‘तत्सम’ ‘तद्भव’ को खा रहा था ! ‘तद्भव’ ‘देशज’ को खा रहा था ! ‘देशज’ को ‘विदेशज’ खा रहा था ! ‘मुद्दा’ ‘मीडिया’ को खा रहा था ! ‘बयान’ को ‘प्रवक्ता’ खा गया ! ‘रंग’ को ‘राजनीती’ खा गयी ! ‘चीन’ को ‘सेक्स’ खा रहा था ! ‘दुनिया’ ‘राजधानी’ को खा रही थी ! ‘स्त्री’ को ‘विज्ञापन’ खा रहा था ! ‘कमज़ोर’ को ‘पत्नी’ खा रही थी ! ‘संज्ञा’ को ‘सर्वनाम’ खा रहा था ! ‘सर्वनाम’ को ‘विशेषण’ खा रहा था ! ‘विशेषण’ को ‘क्रिया’ खा रहा था ! ‘विकारी’ को ‘अविकारी’ खा रहा था ! ‘अर्थ’ को ‘दृष्टि’ खा रही थी ! ‘सार्थक’ को ‘निरर्थक’ खा रहे थे ! ‘कमल’ ‘परमात्मा’ ‘सर्वव्यापी’ सब खाए जा रहे थे ! अलग अलग भाषाओँ के शब्द को अलग अलग भाषाओँ के शब्द खा रहे थे ! उर्दू का ‘शख़्स’ अंग्रज़ी का ‘एजेंडा’ खा गया ! अंग्रेजी का ‘टेलीविजन’ फ़ारसी के ‘आदमी’ को खा गया ! अरबी का ‘रिश्वत’ तुर्की के ‘दरोगा’ को खा गया ! पुर्तगाली का ‘तिज़ोरी’ फ्रांसीसी ‘पुलिस’ को खा रहा था ! यूनानी ‘एटम’ को डच का ‘बम’ खा गया ! ‘व्याकरण’ ‘उपमान’ को खा रहे थे ! शब्द की सारी शक्तियां ‘अभिधा’ ‘लक्षणा’ और ‘व्यंजना’ को खा रहे थे ! मुझ से देखा नहीं गया ! मैं अच्छी तरह जानता हूँ ! सारे शब्द जब खा लिए जायेंगे फिर भी ‘ईश्वर’ ‘प्रेम’ और ‘संसार’ बचा रहेगा ! अंतरिक्ष में नए घर बनेंगे, नया प्रेम होगा और शब्द ही नए शब्द को गढ़ लेंगे !

अथ सेल्फी कथा… / फोटोफिलॉसॉफी‬

फोटो में जा के कोई लौट आया हो ऐसा पहले कभी नहीं हुआ ! कई महीने लापता रहने के बाद मेरी मुलाकात एक ऐसे व्यक्तित्व से हुई जो फोटो में रहकर लौटने का दावा कर रहा है …

आप इतने दिन कहाँ रहे ?
फोटो में था !
फोटो में तो कभी दिखे नहीं ?
सेल्फ़ी में नहीं गया, इसीलिए बचा रहा ! फोटो में रहना है तो सेल्फ़ी से बचिए !
इतने दिन आप फोटो में ही रहे ?
हाँ ! आप मेरा भरोसा क्यों नहीं कर रहे हैं ? मैं अकेला नहीं था वहां ! लाखों लोग फोटो में रहते हैं !
आप खाते क्या थे ?
फोटो में बहुत खाना है ! आपने खाने का फोटो नहीं देखा है ?
आप सोते कहाँ थे ?
फोटो में नींद नहीं आती है ! देखिये आप दुनिया की बात कर रहे हैं ! मैं फोटो की बात कर रहा हूँ … फोटो की दुनिया अलग है !
आप लौटे क्यों ?
बहुत सारे फोटो यहाँ खराब हो रहे हैं ! मैं उनको वापस ले जाने आया हूँ, फोटो की दुनिया में ही फोटो सुरक्षित हैं !
सेल्फ़ी से क्या शिकायत है आपको ?
सेल्फ़ी अहंकार से बनता है, फोटो विनम्रता से ! सेल्फ़ी एक भ्रम है ! सेल्फ़ी फोटो का इस्तेमाल कर के भ्रम फैला रहा है ! सेल्फ़ी कभी फ्रेम में नहीं रह सकते गौर से देखिये जातक का एक हाथ फ्रेम में नहीं दिखेगा ! गर्भ – नाल की तरह एक हाथ या छड़ी सेल्फ़ी से जुडी रहती है ! फोटो इस बात की इजाजत नहीं देता कि कुछ फ्रेम से बाहर रह जाए ! जो फ्रेम से बाहर छूट जाता है वो फोटो में नहीं होता ! फोटो में रहने के लिए आपको फ्रेम में रहना होगा !
सेल्फ़ी के लिए आपका क्या संदेश है ?
सेल्फ़ी को हाथ ले डूबेगा ! जहाँ जहाँ हाथ जायेगा सेल्फ़ी ले आएगा ! सेल्फ़ी दुर्दशा से दुनिया को फोटो ही बचाएगा !
अपने बारे में और बताइए ?
फोटो फ्रेम से कभी बाहर नहीं जाता ! और क्या कहूँ ?
‘ मैं कौन हूँ ‘ ये सवाल जब आपके मन में आता है तो आप क्या जवाब देते हैं ?
मैं फोटो हूँ ! केवल फोटो और कोई नहीं !
आप किसके फोटो हैं ?
मैं अपना फोटो हूँ ! फोटो की दुनिया में भ्रम और द्वन्द नहीं है ! अगर आप फ्रेम में हैं तो फिर कहीं रहें या न रहें फोटो में सदा के लिए रहते हैं !
फोटो में रह कर आप को इस दुनिया की याद नहीं आयी ?
दुनिया तो फोटो में ही है ! हर व्यक्ति का फोटो है ! हर स्थान का फोटो है ! दुनिया लगातार फोटो बनने का सपना देख रही है ! लगातार फोटो खिंचा जा रहा है इस दुनिया में सब फोटो होना चाह रहे हैं !
फोटोग्राफर और फोटो का क्या सम्बन्ध है ?
फोटो हर फोटोग्राफर का लक्ष्य है !
फोटो से पहले क्या अस्तित्व होता है हमारा ?
फोटो से पहले सब हैंडराइटिंग होते हैं ! फिर जो सोचते हैं उसके फोटो हो जाते हैं !
आप की बातों से लगता है फोटो पर दुनिया टिकी है ?
दुनिया प्रेम के बल पर टिकी है और प्रेम सिर्फ फोटो के बल पर टिका है ! प्रेम से आप फोटो निकाल लें तो खाली फ्रेम बचेगा !
सब फोटो ही है तो दुनिया में विचार क्यों हैं ?
विचार से सहमत हों न हों फोटो से सब होते हैं !
फोटो से छेड़ – छाड़ होने की बात सुनने में आई है ! आप का क्या विचार है ?
हम सबको फोटो सीमा में रहना जरुरी है ! फ्रेम से निकलेंगे तो अश्लील हो जायेंगे !
फोटो क्यों जरुरी है ?
फोटो नहीं तो आप कहाँ ?
आप फोटो के पार कुछ नहीं देखते ?
आप राजनीती की बात कर रहे हैं और मैं फोटो की बात कर रहा हूँ ! गोल दुनिया गोलाई में फँसी है ! त्रिकोण में प्रेम फंसा है ! चौकौर खाने में हमारा अस्तित्व है ! फोटो के बिना आप चौकौर अकार के रिक्त स्थान हैं !
मतलब ?
अगर फोटो नहीं है तो आप का परिचय रिक्त है ! फोटो से ही फ्रेंड बनते हैं, प्रेमी बनते हैं, देश – भक्त बनते हैं, नागरिक बनते हैं ! फोटो युग में फोटो ही सबसे बड़ा योग है ! हर समस्या का हल फोटो है ! अब सारे कर्मों का फल फोटो में ही है …! व्यापार, विज्ञान, कला एवं मनोरंजन आदि में फोटो से ही अध्ययन हो पा रहा है ! हर समस्या का हल फोटो है ! हमें बहुत काम करना है ! कितना सारा स्पेस है जिसे हमें भरना है …

फोटो फिलॉसॉफी के बीच से अचानक फोटो महाशय उठ कर चल दिए ! फोटो का फोटो लेने कुछ फोटो आ गए और बीच बीच में फोटो के साथ सेल्फ़ी लेने लगे ! इंटरव्यू बाकी है ! फोटो सेशन के बाद फोटो लौटने वाला है ! फोटो से आप के कुछ सवाल हैं तो कहिये …

 

आत्मरहस्य‬

एक यक्ष प्रश्न है-‘किमाश्चर्यं मतः परम’ अर्थात् सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ? हम अपने आपको नहीं जानते यही सबसे बड़ा आश्चर्य है ! हजारों वर्षों से आदमी के सामने प्रश्न है – कोऽहम् ‘मैं कौन हूं ?’ ‘मैं कौन हूं’ इस प्रश्न के अन्वेषण में आदमी ने अपने अस्तित्व की कई परतें उघाड़ी ! उसे प्रतीत हुआ मेरा यह शरीर मैं नहीं है, मेरी इन्द्रियां, मेरी बुद्धि मैं नहीं है ! एक बिन्दु आया, एक अन्तिम ठहराव आया, साधक के अनुभव में, वह अनुभव था, ‘सोऽहम’ ‘मैं हूं’ मेरे सिवाय अन्य किसी वस्तु का अस्तित्व नहीं है ! ऐसी कितनी ही बातें हैं और ज्ञान की तलाश का कोई निश्चित मार्ग नहीं है ! मैं #आत्मरहस्य को स्वयं अपने अनुभवों से और अनुभूतियों में तलाश रहा हूँ ! मैं अपनी आध्यात्मिक यात्रा में अकेला भटक रहा हूँ ! मेरी लेखनी से यह जाना जा सकता है ! मैं रोज लिखता हूँ जो मेरी अपनी व्यक्तिगत अनुभूतियों से निकली हुई अनर्गल भाव से होते हैं ! मैं अभी सूक्ष्म को नहीं जानता ! स्थूल को जानता हूँ ! शरीर को जानता हूँ ! जो मेरी भावनाओं में लिप्त है ! मैं अपनी पीड़ाओं को देखता हुआ जब अपनी आत्मा में झांकता हूँ तो मुझे कुम्हार के पके हुए बर्तन से दाग दीखते हैं ! कुम्हार के पास कई बर्तन बे दाग भी होते हैं ! लोग उनको ही लेना पसंद करते हैं ! पर मुझे वो बर्तन भी भाते हैं जिन पर भट्टी की आग की ताप की कालिख का दाग होता है ! और मैं अक्सर अपने आप को वैसा ही पाता हूँ ! अन्य सत्य भी है और जो मेरी अनुभूति है वो भी …

 

१.

पवित्र मन भी कहीं – कहीं से काला होता जाता है ! तपता हुआ, कुंदन होता हुआ, भष्म होने के लिए छोड़ दिया गया अहंकार, अज्ञान, काम, क्रोध, ईर्ष्या की ज्वाला की लपटें आत्मसाक्षात्कार की भट्टी पर चढ़ी आत्मा पर कालिख छोड़ ही जाती है …

२.

रात दिन के भरोसे नहीं रहती ! और दिन रात के भरोसे नहीं रहता ! रात, अपने सितारे अपना आकाश और अपना अँधेरा सब अपने साथ लाती है, और उन्हें अपने साथ ही ले जाती है ! दिन भी रात के लिए कुछ नहीं छोड़ता ! अपनी रौशनी, अपना आसमान और अपना तारा अपने साथ ही लाता है और उन्हें अपने साथ ही ले जाता है ! हम भी दोनों को अपने आप का अलग – अलग हिस्सा देते हैं ! दिन में हम अलग होते हैं, और रात में बिलकुल अलग ! हमारे दिन का मन अलग होता है और रात का बिलकुल अलग ! बीच – बीच में हम भी रात और दिन की तरह ही अलग – अलग होते हैं ! जैसे दिन में सुबह अलग होती है और दोपहर अलग ! रात में शाम अलग होती है और आधी रात अलग ! रात और दिन की तरह ही हम हर पल बदलते रहते हैं ! जैसे रात हर पल दिन की तरफ बढ़ती रहती है और दिन हर पल रात की तरफ बढ़ता रहता है ! हम भी कभी कहीं एक जैसे नहीं होते ! हमारी कोई रात किसी और रात सी नहीं होती ! हमारा कोई दिन किसी और दिन सा नहीं होता ! ये कोई जादू है या फिर कोई रहस्य ? कहाँ से आतीं हैं इतने रातें ? और कहाँ से आते हैं इतने दिन ? और इनको अलग – अलग देने के लिए हर पल हमारे पास अलग – अलग नया मन कहाँ से आता रहता है ?

३.

अपने ही मंदार में लिपटा हुआ आज मैं अपना नाग स्वयं था ! अपनी मुंह और अपनी पूँछ में बँटा हुआ अपनी मंथन में अपना वासुकि भी आज मैं स्वयं बना ! मेरे मुँह की तरफ मेरे दैत्य थे और मेरे देवताओं ने मेरी पूँछ पकड़ रखी थी ! भगवान नारायण ने दानव रूप से दानवों में और देवता रूप से देवताओं में शक्ति का संचार किया ! मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकला ! विष की ज्वाला से मेरे देवता और मेरे दैत्य जलने लगे ! उनकी चमक फीकी पड़ने लगी ! मेरे देवताओं और मेरे दैत्यों ने मिल कर शिव की आराधना की ! नीलकण्ठ ने मेरी हथेली पर मेरे विष को रख दिया और मुझ से पीने के लिए कहा ! मैंने हलाहल उनकी चरणो में रख कर अपनी आँखें मूँद लीं ! मेरी आँखें जब खुलीं तो मेरी आंसुओं में आज मेरा सारा गरल बह गया ! आज अपने आत्ममंथन में अपना महादेव भी मैं स्वयं था …

४.

अंतरिक्ष के जिस रौशनी में अभी पृथ्वी नहा रही है वहां की रिक्तता कितनी भयावह होती होगी ? जब पृथ्वी घूमती हुई अन्धकार में चली जाती है, अंतरिक्ष के शून्य में व्याप्त रौशनी कितनी रिक्त और निर्जीव हो जाती होगी …

५.

डार से बिछुड़ते ही हम फिर मिलने की उम्मीद से बंध जाते हैं … टूटते ही फिर से जुड़ने की परिकल्पना बन जाती है … जाने के बाद ही आना होता है …सच के भरोसे ही झूठ को हम टटोलते हैं …पता नहीं ख़ुशी को ग़म के बगैर कैसे पहचानते… ? अन्त ही शुरुआत है  …

क्रमशः

मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ?

मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ? आप मोदी रख लीजिये मैं देश रख लेता हूँ ! क्या ? आपको मोदी नहीं रखना ? ओ के ! फिर देश आप रख लीजिये मैं मोदी रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

मैं कार्टून रख लेता हूँ, आप संसद रख लीजिये ! क्या ? आपको संसद नहीं रखना ? ओ के ! फिर कार्टून आप रख लीजिये मैं संसद रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप किसान रख लीजिये मैं पोर्न रख लेता हूँ ! क्या ? आपको किसान नहीं रखना ? ओ के ! फिर पोर्न आप रख लीजिये मैं किसान रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप कांग्रेस रख लीजिये मैं आज़ादी रख लेता हूँ ! क्या ? आपको कांग्रेस नहीं रखना ? ओ के ! फिर आज़ादी आप रख लीजिये मैं कांग्रेस रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप सलामी रख लीजिये मैं तस्वीर रख लेता हूँ ! क्या ? आपको सलामी नहीं रखना ? ओ के ! फिर तस्वीर आप रख लीजिये मैं सलामी रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप विज्ञापन रख लीजिये मैं कार्यक्रम रख लेता हूँ ! क्या ? आपको विज्ञापन नहीं रखना ? ओ के ! फिर कार्यक्रम आप रख लीजिये मैं विज्ञापन रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप सिद्धांत रख लीजिये मैं शुभकामनाएँ रख लेता हूँ ! क्या ? आपको सिद्धांत नहीं रखना ? ओ के ! फिर शुभकामनायें आप रख लीजिये मैं सिद्धांत रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप संबंध रख लीजिये मैं दिशा रख लेता हूँ ! क्या ? आपको संबंध नहीं रखना ? ओ के ! फिर दिशा आप रख लीजिये मैं संबंध रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप विरोधी रख लीजिये मैं संस्कृति रख लेता हूँ ! क्या ? आपको विरोधी नहीं रखना ? ओ के ! फिर संस्कृति आप रख लीजिये मैं विरोधी रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप मामला रख लीजिये मैं माहौल रख लेता हूँ ! क्या ? आपको मामला नहीं रखना ? ओ के ! फिर माहौल आप रख लीजिये मैं मामला रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप रायता रख लीजिये मैं बूंदी रख लेता हूँ ! क्या ? आपको रायता नहीं रखना ? ओ के ! फिर बूंदी आप रख लीजिये मैं रायता रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

 

गाली कैसे बनती है ? गाली क्या है ?

निंदा या कलंकसूचक वाक्य गाली है ! कोई भी फूहड़ बात गाली हो सकती है ! कलंकसूचक आरोप या दुर्वचन सुनने को गाली खाना कहते हैं ! गाली लेने से लगती है देने भर से नहीं ये भी एक पुराना मुहावरा है ! विवाह आदि में गाया जानेवाला एक प्रकार का रस्मी गीत जो अश्लील होता है उसे भी गाली कहते हैं जिसे लोग प्यार से खाते हैं ! गाली का रिश्ता सेहत और सम्मान से भी है !
‘अंग – प्रत्यंग’ को जब भी सामाजिक रिश्तों के साथ जोड़ा जाता है तो वो गाली हो जाती है ! गाली को गौर से सुन के देखिये लगता है रिश्तों और अंगों की कव्वाली हो रही है ! सामाजिक संबंधों का शारीरिक अंगों के साथ तुलनात्मक व्यवहार बड़ी आसानी से गाली बन जाती है ! अब गाली दोस्ती का नया गहना है मानो कह रहे हों बुरा न मानो गाली है ! जितना मुंह अब उतनी गाली है ! क्रोध में या चिढ के या अधीर होकर मन जब शब्दों का ख़ास अंदाज़ और उच्चारण में प्रयोग करता है तो गाली बनती है ! गाली एक मौखिक हिंसा का रूप भी ले लेती है ! सांस लेने से ज्यादा हवा आप अपने फेफरे में गाली दे के भर सकते हैं ! गाली दे कर मन को शांति मिलती है ! सोशल मीडिया पर खिलाफत में लैंगिक, नस्ली, और व्यक्तिगत नकारात्मक आक्रामक टिप्पणी या आलोचना भी गाली का नया रूप है !
गालियों के चार प्रकार हो सकते हैं ! मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, लैंगिक और शारीरिक !
अक्सर, अंग + सामाजिक सम्बन्ध + शारीरिक क्रिया + जानवर के नाम का मिश्रण गाली हो जाता है !
आज कल अंगो के कुछ पर्याय सिर्फ गाली में ही प्रयोग किये जाते हैं ! नुख्ते और उच्चारण की वजह से कई गाली अपना आपा खो बैठते हैं !
गन्दे, भद्दे, मूर्ख, चतुर, कपटी, संत, लोभी, लालची, महापुरूष अब ये संस्कृत के शब्द लगने लगे हैं और सब व्यंग्य के अलंकार हैं ! गालियों में तुलनात्मक सम्बन्ध जोड़े जाते हैं !
‘मादरचोद’ एक ऐसा शब्द है जिसमे क्रोध और भड़ास से निकलने की सबसे बड़ी खिड़की है ! ‘गांडू’ अब खुले आम ‘स्ट्रीट स्मार्ट’ है और एक सफल अंतर्राष्ट्रीय हिन्दुस्तानी फिल्म भी ! ‘गांड मार लूँगा’ या ‘गांड मार दूंगा’ रूठना भर है ! ‘अबे चूतिये’ नया हेल्लो है ! ‘साला’ वाक्यों के बीच का कोमा है ! ‘बेहनचोद’ दिल्ली है ! ‘हरामजादा’ ज्यादातर काम करने वाले लोग हैं ! ‘बेईमान’ एक इशारा है ! ‘भ्रष्ट’ एक बहुत बड़े देश का नाम लगने लगा है ! ‘केरेक्टर ढीला’ सलमान खान का हिट गाना है ! ‘रंडी’ ज्यादातर एक्स गर्ल – फ्रेंड है ! ‘लंड’ अब तक ब्रांड क्यों नहीं बना आश्चर्य है और इस से बड़ा कौन है ? ‘लौडू’ ‘चोदु’ ‘भोसड़ी’ ‘चल – चल’ जोश भरने के लिए भाईचारे के नए शब्द हैं ! ‘फ़िल्मी’ फैशन है ! कोई आपको ‘भाईसाहब’ बोले तो समझिये बात नहीं बनेगी वो नाराज है ! ‘लंड की टोपी’ और ‘झांटों की जूँ’ लगता है हाइजीन को लेकर कॉमेंट है ! ‘गांड की हड्डी’ तोड़ते हुए मैंने लोगों को देखा है ! अस्तुरे से गांड काटने की धमकी पाकेट मार को खूब दी जाती है ! ‘माँ की आँख’ और ‘तेरी माँ का साकीनाका’ शहरी गाली हैं ! खूब क्रिएटिव होकर गाली देने वाले खुशमिजाज होते हैं उनकी गाली सुनने लोग दूर दूर से आते हैं ! औरतों के मुह से ये सब गाली अब भी मन को कामुक बना सकता है और आप भावुक हो रहे हैं ?
सुना है देश के कुछ शहर में एक नम्बर का ‘गाली शहर’ होने की भी होड़ है ! ‘गाली गंज’, ‘गाली पुर’, या ‘गाली सराय’ नए ‘स्मार्ट सिटी’ हो सकते हैं ! घरेलू हिंसा की गाली घरेलु नहीं होती ! दुर्व्यवहार अब नया व्यवहार है !
आप चाहेंगे तभी ये सब शब्द गाली होगी वरना अब ये सिर्फ बोल चाल की नयी भाषा है ! वैसे ऊँचा और साफ़ बोला गया हर शब्द अब गाली हो सकता है !

* इस पोस्ट की चोरी भी एक गाली होगी ! जो चुराने वाले को लग जाएगी !

“सोशल मीडिया में एक्टिंग”

‘एक्टिंग’ में ‘सोशल मीडिया’ के आने से एक्टिंग को अब आप पाँच नए हिस्सों में बाँट सकते हैं !
पहला है ‘फोटो एक्टिंग’ ! ‘फोटो एक्टिंग’ का उपयोग व्हाट्सऐप, फेसबुक, और ट्विटर ‘मंच’ पर कर सकते हैं ! फोटो एक्टिंग भाव प्रधान एक्टिंग है ! स्थान, काल, पात्र से मुक्त ! फोटो एक्टिंग को ‘वस्त्र विशेष’ एक्टिंग भी कह सकते हैं ! फोटो एक्टिंग में ‘प्रोफाइल फोटो एक्टिंग’ की तारीफ सबसे ज्यादा होती है ! ‘सेल्फ़ी’ इसका नया उप – अंग है !
दूसरा है ‘यू ट्यूब एक्टिंग’ ! ये ‘एडिटिंग प्रधान’ एक्टिंग है ! ‘यू ट्यूब एक्टिंग’ में आप बहुमुखी पात्रों को बड़ी सहजता से खेल सकते हैं ! ‘यू ट्यूब’ एक्टिंग को आप व्हाट्सऐप पर भी देख सकते हैं !
तीसरा है ‘स्टेटस एक्टिंग’ ! ‘स्टेटस एक्टिंग’ फेसबुक प्रधान एक्टिंग है ! इसमें आप भविष्य में होने वाले एक्टिंग को भी दिखा सकते हैं ! ‘शेयर’ करने से ‘स्टेटस एक्टिंग’ बढ़ता है !  ‘स्टेटस एक्टिंग’ की त्रुटि आप ‘कमेंट’ कर के सुधार सकते हैं !
चौथा है ‘इनबॉक्स एक्टिंग’ ! अभिनेता ‘इनबॉक्स एक्टिंग’ में सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंट होते हैं ! इनबॉक्स में फोर्थ वॉल का काल्पनिक हिस्सा प्रोसीनियम थिएटर से आया है ! ये मूलतः एक दर्शक के लिए ही किया जाता है !
पाँचवाँ है ‘हैश टैग एक्टिंग’ ! ‘हैश टैग एक्टिंग’ में आप एक पात्र को अलग अलग भावनाओं से ‘टैग’ कर सकते हैं ! ‘हैश टैग एक्टिंग’ अभी ‘एक्सपेरिमेंटल थिएटर’ का हिस्सा है !
सोशल मिडिया में ‘एक्टिंग’ का भविष्य उज्वल है ! ‘ओवर एक्टिंग’ को सोशल मिडिया से कोई फर्क नहीं पड़ा है ! वेबसाइट और इ मेल भी सोशल मिडिया एक्टिंग में उपयोगी हैं ! सोशल मिडिया एक्टिंग में लगातार सीखने का भ्रम बना रहता है ! ‘फिल्म एक्टिंग’ अब भी ‘सोशल मिडिया मंच’ पर एक्टिंग का बाप है !

#‎रायतारिपोर्ट‬ ( top secret )

सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति ओबामा को रायता नहीं परोसा जायेगा ! थाली में रायते को फैलने से रोकने में असक्षम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं ! रायता ने इस बात के लिए आपत्ति जताई है और पतले व्यंजनों के संघ ने दही, चटनी, घी, रायता के फैलने को अपनी संस्कृति बताया है ! एक ज्ञापन में रायता ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है ! उनका कहना है फैलना हमारा धर्म है ! हम हर भोज में फैलेंगे ! विश्व में रायता का डंका जरूर बजेगा ! फैलने के अपने विशिष्ट गुण की वजह से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने रायते को थाली से दूर रखने की सिफारिश की थी ! रायता को थाली में ट्रैक करने के लिए जी पी आर एस लगवा देने की सिफारिश को भारत ने मानने से इंकार कर दिया ! एक अमेरिकी दल ने अपने विशेष रिपोर्ट में रायते को रहस्यमय बताया और अपने किये गए अध्ययन का खुलासा करते हुए रायता को भरोसे लायक नहीं बताया ! रायता समतल थाली में हर तरफ फैलता है ! भोजन के पूर्वा – अभ्यास में अमरीकियों से रायता नहीं संभला और फ़ैल गया ! किसी की थाली में ब्रेड से लिपट गया तो किसी के केक को चौपट कर गया ! रायता परोसते ही अमरीकी ‘शिट – शिट’ करने लगे ! कुछ के हाथ से थाली छूट गयी और पतलून पर रायता फैल गया ! कुछ कमांडो किसी तरह अपने रायते पर काबू पा सके और उसे उन्होंने अमेजिंग रायता का नाम दिया !

#क्रिकेट_का_भूत

खाली दिमाग क्रिकेट के भूत का घर है ;)

हिंदुस्तान और पाकिस्तान को डराने के लिए क्रिकेट का भूत ऑस्ट्रेलिया भी चला जाता है ;)

क्रिकेट का भूत विज्ञापन के चक्कर में न्यूज़ देखता है ;)

क्रिकेट का भूत भी वर्ल्ड – कप के लिए मरता है ;)

आदमी की ही तरह क्रिकेट का भूत भी हिन्दू मुसलमान होता है ;)

कोई खेले न खेले क्रिकेट का भूत हर आत्मा से खेलता है ;)

क्रिकेट का भूत देश को भूतनी के हवाले कर देता है ;)

क्रिकेट का भूत दाऊद से भी नहीं डरता ;)

क्रिकेट के भूत में बिपाशा नहीं बच्चन हैं ;)

क्रिकेट का भूत भटकते भटकते पाकिस्तान पहुँच ही जाता है ;)

 

आओ करें डिबेट

इस पेट से उस पेट
आओ करें डिबेट

किसने छोड़ा जंतर मंतर
कौन पहुंचेगा इंडिया गेट

देश का नेता कैसा हो
कैसे वेट हो ड्राई स्टेट

कैसे मिली आजादी, और
किसने कर दिया मटियामेट
आओ करें डिबेट

कौन है हारल, कौन है वायरल
मेरी स्ट्रैटेजी, या तेरी ट्रेजेडी

कौन खायेगा फिश फ्राई
कौन वेजिटेबल कटलेट

फां – फूं, अलाय – बलाय
कुछ नॉइस करें क्रिएट
आओ करें डिबेट

हरा, गेरुआ रंग में किसने
पॉलिटिक्स दिया है फेंट
मेरा पेट तेरा पेट
आओ करें डिबेट

कौन लिखेगा किस्मत
गरीब जनता या अमीर कैंडिडेट
कौन करेगा कट पेस्ट
आओ करें डिबेट

मेरा रिबेट, तेरा रेट
इम्प्लीमेंटेशन का दावा
और लाग लपेट

मिडिया करेगी डांस
जनता करेगी वेट
इस पेट से उस पेट
आओ करें डिबेट

‪#‎वोटविचार‬

- एक वोट कई विचार रखता है !

– बहुत सारे विचार हैं पर वो एक वोट भर भी नहीं हैं !

– आपके धर्म के साथ कुछ भी हो सकता है पर आपके वोट का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता !

– वोट को कोई धर्म काट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म लूट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म छीन नहीं सकता / वोट को कोई धर्म बाँट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म खरीद नहीं सकता / वोट को कोई धर्म बेच नहीं सकता / आपने किसको वोट दिया कोई धर्म जान नहीं सकता / वोट हर धर्म में गुप्त है !

– आप किसी के भी नौकर हो सकते हैं पर अपने वोट के मालिक हैं !

– आप नहीं भी रहें लेकिन आपका दिया हुआ वोट पांच साल तक रहेगा !

–  अठारह साल में मिली हर शक्ति क्षीण हो सकती है पर वोट देने की ताक़त जीवन भर ख़त्म नहीं होती !

– चाहे कोई किसी भी वोट बैंक में आपको रख ले आप अकेले वहाँ से सेंध मार के निकल सकते हैं !

– अपना वोट सवा सौ करोड़ का नोट !