गाली कैसे बनती है ? गाली क्या है ?

निंदा या कलंकसूचक वाक्य गाली है ! कोई भी फूहड़ बात गाली हो सकती है ! कलंकसूचक आरोप या दुर्वचन सुनने को गाली खाना कहते हैं ! गाली लेने से लगती है देने भर से नहीं ये भी एक पुराना मुहावरा है ! विवाह आदि में गाया जानेवाला एक प्रकार का रस्मी गीत जो अश्लील होता है उसे भी गाली कहते हैं जिसे लोग प्यार से खाते हैं ! गाली का रिश्ता सेहत और सम्मान से भी है !
‘अंग – प्रत्यंग’ को जब भी सामाजिक रिश्तों के साथ जोड़ा जाता है तो वो गाली हो जाती है ! गाली को गौर से सुन के देखिये लगता है रिश्तों और अंगों की कव्वाली हो रही है ! सामाजिक संबंधों का शारीरिक अंगों के साथ तुलनात्मक व्यवहार बड़ी आसानी से गाली बन जाती है ! अब गाली दोस्ती का नया गहना है मानो कह रहे हों बुरा न मानो गाली है ! जितना मुंह अब उतनी गाली है ! क्रोध में या चिढ के या अधीर होकर मन जब शब्दों का ख़ास अंदाज़ और उच्चारण में प्रयोग करता है तो गाली बनती है ! गाली एक मौखिक हिंसा का रूप भी ले लेती है ! सांस लेने से ज्यादा हवा आप अपने फेफरे में गाली दे के भर सकते हैं ! गाली दे कर मन को शांति मिलती है ! सोशल मीडिया पर खिलाफत में लैंगिक, नस्ली, और व्यक्तिगत नकारात्मक आक्रामक टिप्पणी या आलोचना भी गाली का नया रूप है !
गालियों के चार प्रकार हो सकते हैं ! मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, लैंगिक और शारीरिक !
अक्सर, अंग + सामाजिक सम्बन्ध + शारीरिक क्रिया + जानवर के नाम का मिश्रण गाली हो जाता है !
आज कल अंगो के कुछ पर्याय सिर्फ गाली में ही प्रयोग किये जाते हैं ! नुख्ते और उच्चारण की वजह से कई गाली अपना आपा खो बैठते हैं !
गन्दे, भद्दे, मूर्ख, चतुर, कपटी, संत, लोभी, लालची, महापुरूष अब ये संस्कृत के शब्द लगने लगे हैं और सब व्यंग्य के अलंकार हैं ! गालियों में तुलनात्मक सम्बन्ध जोड़े जाते हैं !
‘मादरचोद’ एक ऐसा शब्द है जिसमे क्रोध और भड़ास से निकलने की सबसे बड़ी खिड़की है ! ‘गांडू’ अब खुले आम ‘स्ट्रीट स्मार्ट’ है और एक सफल अंतर्राष्ट्रीय हिन्दुस्तानी फिल्म भी ! ‘गांड मार लूँगा’ या ‘गांड मार दूंगा’ रूठना भर है ! ‘अबे चूतिये’ नया हेल्लो है ! ‘साला’ वाक्यों के बीच का कोमा है ! ‘बेहनचोद’ दिल्ली है ! ‘हरामजादा’ ज्यादातर काम करने वाले लोग हैं ! ‘बेईमान’ एक इशारा है ! ‘भ्रष्ट’ एक बहुत बड़े देश का नाम लगने लगा है ! ‘केरेक्टर ढीला’ सलमान खान का हिट गाना है ! ‘रंडी’ ज्यादातर एक्स गर्ल – फ्रेंड है ! ‘लंड’ अब तक ब्रांड क्यों नहीं बना आश्चर्य है और इस से बड़ा कौन है ? ‘लौडू’ ‘चोदु’ ‘भोसड़ी’ ‘चल – चल’ जोश भरने के लिए भाईचारे के नए शब्द हैं ! ‘फ़िल्मी’ फैशन है ! कोई आपको ‘भाईसाहब’ बोले तो समझिये बात नहीं बनेगी वो नाराज है ! ‘लंड की टोपी’ और ‘झांटों की जूँ’ लगता है हाइजीन को लेकर कॉमेंट है ! ‘गांड की हड्डी’ तोड़ते हुए मैंने लोगों को देखा है ! अस्तुरे से गांड काटने की धमकी पाकेट मार को खूब दी जाती है ! ‘माँ की आँख’ और ‘तेरी माँ का साकीनाका’ शहरी गाली हैं ! खूब क्रिएटिव होकर गाली देने वाले खुशमिजाज होते हैं उनकी गाली सुनने लोग दूर दूर से आते हैं ! औरतों के मुह से ये सब गाली अब भी मन को कामुक बना सकता है और आप भावुक हो रहे हैं ?
सुना है देश के कुछ शहर में एक नम्बर का ‘गाली शहर’ होने की भी होड़ है ! ‘गाली गंज’, ‘गाली पुर’, या ‘गाली सराय’ नए ‘स्मार्ट सिटी’ हो सकते हैं ! घरेलू हिंसा की गाली घरेलु नहीं होती ! दुर्व्यवहार अब नया व्यवहार है !
आप चाहेंगे तभी ये सब शब्द गाली होगी वरना अब ये सिर्फ बोल चाल की नयी भाषा है ! वैसे ऊँचा और साफ़ बोला गया हर शब्द अब गाली हो सकता है !

* इस पोस्ट की चोरी भी एक गाली होगी ! जो चुराने वाले को लग जाएगी !

“सोशल मीडिया में एक्टिंग”

‘एक्टिंग’ में ‘सोशल मीडिया’ के आने से एक्टिंग को अब आप पाँच नए हिस्सों में बाँट सकते हैं !
पहला है ‘फोटो एक्टिंग’ ! ‘फोटो एक्टिंग’ का उपयोग व्हाट्सऐप, फेसबुक, और ट्विटर ‘मंच’ पर कर सकते हैं ! फोटो एक्टिंग भाव प्रधान एक्टिंग है ! स्थान, काल, पात्र से मुक्त ! फोटो एक्टिंग को ‘वस्त्र विशेष’ एक्टिंग भी कह सकते हैं ! फोटो एक्टिंग में ‘प्रोफाइल फोटो एक्टिंग’ की तारीफ सबसे ज्यादा होती है ! ‘सेल्फ़ी’ इसका नया उप – अंग है !
दूसरा है ‘यू ट्यूब एक्टिंग’ ! ये ‘एडिटिंग प्रधान’ एक्टिंग है ! ‘यू ट्यूब एक्टिंग’ में आप बहुमुखी पात्रों को बड़ी सहजता से खेल सकते हैं ! ‘यू ट्यूब’ एक्टिंग को आप व्हाट्सऐप पर भी देख सकते हैं !
तीसरा है ‘स्टेटस एक्टिंग’ ! ‘स्टेटस एक्टिंग’ फेसबुक प्रधान एक्टिंग है ! इसमें आप भविष्य में होने वाले एक्टिंग को भी दिखा सकते हैं ! ‘शेयर’ करने से ‘स्टेटस एक्टिंग’ बढ़ता है !  ‘स्टेटस एक्टिंग’ की त्रुटि आप ‘कमेंट’ कर के सुधार सकते हैं !
चौथा है ‘इनबॉक्स एक्टिंग’ ! अभिनेता ‘इनबॉक्स एक्टिंग’ में सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंट होते हैं ! इनबॉक्स में फोर्थ वॉल का काल्पनिक हिस्सा प्रोसीनियम थिएटर से आया है ! ये मूलतः एक दर्शक के लिए ही किया जाता है !
पाँचवाँ है ‘हैश टैग एक्टिंग’ ! ‘हैश टैग एक्टिंग’ में आप एक पात्र को अलग अलग भावनाओं से ‘टैग’ कर सकते हैं ! ‘हैश टैग एक्टिंग’ अभी ‘एक्सपेरिमेंटल थिएटर’ का हिस्सा है !
सोशल मिडिया में ‘एक्टिंग’ का भविष्य उज्वल है ! ‘ओवर एक्टिंग’ को सोशल मिडिया से कोई फर्क नहीं पड़ा है ! वेबसाइट और इ मेल भी सोशल मिडिया एक्टिंग में उपयोगी हैं ! सोशल मिडिया एक्टिंग में लगातार सीखने का भ्रम बना रहता है ! ‘फिल्म एक्टिंग’ अब भी ‘सोशल मिडिया मंच’ पर एक्टिंग का बाप है !

#‎रायतारिपोर्ट‬ ( top secret )

सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति ओबामा को रायता नहीं परोसा जायेगा ! थाली में रायते को फैलने से रोकने में असक्षम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं ! रायता ने इस बात के लिए आपत्ति जताई है और पतले व्यंजनों के संघ ने दही, चटनी, घी, रायता के फैलने को अपनी संस्कृति बताया है ! एक ज्ञापन में रायता ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है ! उनका कहना है फैलना हमारा धर्म है ! हम हर भोज में फैलेंगे ! विश्व में रायता का डंका जरूर बजेगा ! फैलने के अपने विशिष्ट गुण की वजह से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने रायते को थाली से दूर रखने की सिफारिश की थी ! रायता को थाली में ट्रैक करने के लिए जी पी आर एस लगवा देने की सिफारिश को भारत ने मानने से इंकार कर दिया ! एक अमेरिकी दल ने अपने विशेष रिपोर्ट में रायते को रहस्यमय बताया और अपने किये गए अध्ययन का खुलासा करते हुए रायता को भरोसे लायक नहीं बताया ! रायता समतल थाली में हर तरफ फैलता है ! भोजन के पूर्वा – अभ्यास में अमरीकियों से रायता नहीं संभला और फ़ैल गया ! किसी की थाली में ब्रेड से लिपट गया तो किसी के केक को चौपट कर गया ! रायता परोसते ही अमरीकी ‘शिट – शिट’ करने लगे ! कुछ के हाथ से थाली छूट गयी और पतलून पर रायता फैल गया ! कुछ कमांडो किसी तरह अपने रायते पर काबू पा सके और उसे उन्होंने अमेजिंग रायता का नाम दिया !

#क्रिकेट_का_भूत

खाली दिमाग क्रिकेट के भूत का घर है ;)

हिंदुस्तान और पाकिस्तान को डराने के लिए क्रिकेट का भूत ऑस्ट्रेलिया भी चला जाता है ;)

क्रिकेट का भूत विज्ञापन के चक्कर में न्यूज़ देखता है ;)

क्रिकेट का भूत भी वर्ल्ड – कप के लिए मरता है ;)

आदमी की ही तरह क्रिकेट का भूत भी हिन्दू मुसलमान होता है ;)

कोई खेले न खेले क्रिकेट का भूत हर आत्मा से खेलता है ;)

क्रिकेट का भूत देश को भूतनी के हवाले कर देता है ;)

क्रिकेट का भूत दाऊद से भी नहीं डरता ;)

क्रिकेट के भूत में बिपाशा नहीं बच्चन हैं ;)

क्रिकेट का भूत भटकते भटकते पाकिस्तान पहुँच ही जाता है ;)

 

आओ करें डिबेट

इस पेट से उस पेट
आओ करें डिबेट

किसने छोड़ा जंतर मंतर
कौन पहुंचेगा इंडिया गेट

देश का नेता कैसा हो
कैसे वेट हो ड्राई स्टेट

कैसे मिली आजादी, और
किसने कर दिया मटियामेट
आओ करें डिबेट

कौन है हारल, कौन है वायरल
मेरी स्ट्रैटेजी, या तेरी ट्रेजेडी

कौन खायेगा फिश फ्राई
कौन वेजिटेबल कटलेट

फां – फूं, अलाय – बलाय
कुछ नॉइस करें क्रिएट
आओ करें डिबेट

हरा, गेरुआ रंग में किसने
पॉलिटिक्स दिया है फेंट
मेरा पेट तेरा पेट
आओ करें डिबेट

कौन लिखेगा किस्मत
गरीब जनता या अमीर कैंडिडेट
कौन करेगा कट पेस्ट
आओ करें डिबेट

मेरा रिबेट, तेरा रेट
इम्प्लीमेंटेशन का दावा
और लाग लपेट

मिडिया करेगी डांस
जनता करेगी वेट
इस पेट से उस पेट
आओ करें डिबेट

‪#‎वोटविचार‬

- एक वोट कई विचार रखता है !

– बहुत सारे विचार हैं पर वो एक वोट भर भी नहीं हैं !

– आपके धर्म के साथ कुछ भी हो सकता है पर आपके वोट का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता !

– वोट को कोई धर्म काट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म लूट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म छीन नहीं सकता / वोट को कोई धर्म बाँट नहीं सकता / वोट को कोई धर्म खरीद नहीं सकता / वोट को कोई धर्म बेच नहीं सकता / आपने किसको वोट दिया कोई धर्म जान नहीं सकता / वोट हर धर्म में गुप्त है !

– आप किसी के भी नौकर हो सकते हैं पर अपने वोट के मालिक हैं !

– आप नहीं भी रहें लेकिन आपका दिया हुआ वोट पांच साल तक रहेगा !

–  अठारह साल में मिली हर शक्ति क्षीण हो सकती है पर वोट देने की ताक़त जीवन भर ख़त्म नहीं होती !

– चाहे कोई किसी भी वोट बैंक में आपको रख ले आप अकेले वहाँ से सेंध मार के निकल सकते हैं !

– अपना वोट सवा सौ करोड़ का नोट !

लघु लोक कथा ‪#‎ललोक

तालाब के किनारे कोई चिल्ला रहा था ” कमल में किरण … कमल में किरण …” उत्साह में सब उस तरफ भागे … तालाब के बीचोबीच कमल के पास किरण फूट रही थी, देखने की हड़बड़ में कुछ लोग छप छप तालाब में गिर रहे थे … शोर सुनकर पंछी ‘ट्वीट – ट्वीट’ करने लगे … पोखर पर झाड़ियों के पीछे शेर के कान खड़े हो गए … उसने तालाब पर शिकार का झुण्ड देख लिया था … पानी में कमल के पास घड़ियाल की पीठ उगते सूरज में चमक रही थी !

महानगरीय सोच / महालोक २३

वो महानगर में अक्सर सोचता –
सोचते सोचते सो जाता और नींद में जाकर सपने में सोचने लगता, सोचता हुआ गाने लगता ! गाते गाते रोने लगता और रोते, रोते सोचता ! वो सोचता हुआ चलता चला जाता, और सोचते सोचते सातों समुन्दर पार कर जाता ! वो सोचता हुआ पहुँच जाता किसी ऐसे जगह जो पहले कभी सोची नहीं गयी होती ! वो वहां भी सोचने लगता ! उसके सोच की सीमा हर सीमा को लाँघ चुकी थी ! उसकी सोच हर विंदू को छू चुकी थी ! वो हर सांस में सोचता ! इतना सोचता की सांस लेते ही मोटा हो जाता और सांस छोड़ते ही पतला हो जाता ! वो जिधर देखता सोचने लगता ! जो सुनता सोचने लगता ! जो पढता सोचने लगता ! सोचने से उसके ख्याल बढ़ते ! वो और सोचता और उसके ख्याल और बढ़ते ! स्वाद, भूख, नशा, घमंड, इत्र, लड़की, जानवर, सोना, ईश्वर, संभोग वो सब पर एक साथ सोचता ! उसकी सोच से रोटियाँ फूलने लगतीं, अमरुद पक जाते, सूरज उगता, चढ़ता और डूब जाता ! मौसम बदल जाते ! वो इतना सोचता कि सोच में बच्चे बड़े होकर बूढ़े हो जाते और फिर मर जाते ! औरतें गर्भवती हो जातीं ! अपनी सोच में वो उनके गर्भाशय में सोच भर देता ! माएँ सोच पैदा करतीं ! औरत मर्द मिल के सोचते और सोच सोच के बच्चे पैदा करते ! वो हर तस्वीर पर सोचता ! जब सब उसके सोच की तस्वीरें देखते तब वो तस्वीरों के पीछे बैठ कर सोचता ! वो बड़ा सोचता ! वो इतना सोचता कि छोटी सोच भी बड़ी हो जाती ! वो नया सोचता ! उसके सोच से दिशा बदल जाती ! पूरब पश्चिम हो जाता ! उत्तर दक्षिण हो जाता ! उसकी सोच बड़ी होने लगी और वो अपनी सोच से छोटा होने लगा ! एक दिन वो गायब हो गया ! उसकी सोच उसे कहाँ ले गई ये हम और आप सोच भी नहीं सकते ! वो अभी कहाँ है मुझे नहीं पता पर उसे जरूर पता होगा कि अभी इस वक़्त जब हम उसके बारे में सोच रहें हैं तो उसे कहाँ होना चाहिए ! वो इन बातों को बहुत पहले सोच चूका था ! अभी वो जहाँ भी होगा इसके आगे सोच रहा होगा ! और क्या पता उसने सब सोच भी लिया हो …

‪#‎बदलाव‬

- तुम कितने बदले बतलाओ बदलाव ?

– बदला ले रहे हैं या बदलाव ला रहे हैं ?

– दुराव छुपाव और बदलाव सब एक है !

– बदलाव बस एक प्रस्ताव है !

– आव देखा न ताव कर दिया बदलाव !

– बदलाव, bad – law है !

– बदलाव की राजनीति में राजनीति होती है बदलाव नहीं !

– आओ, जाओ, बदलाव !

– बदलाव है या ऊदबिलाव ?

महानगर में खिंचा – खींची / महालोक – २२

आँख से तो कोई कुछ देखना ही नहीं चाहता सबको मोबाइल कैमरे में सब खींच के किसी और को दिखाना है ! जिसके लिए ये सब किया जाता है वो भी मोबाइल कैमरे में सब कुछ किसी तीसरे के लिए खींच रहा है ! फोटो की खिंचा – खींची में दृश्य की असली तस्वीर मन की आँख से ली ही नहीं जाती … हम देखते ही रह जाते हैं …